भोजन की प्रार्थना का शंका समाधान

5 Dec

भोजन की प्रार्थना का शंका समाधान

अन्नपतेSन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः |

प्रप्र दातारं तारिषऽ ऊर्ज्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे | यजु: ११/८३

पदार्थ: – हे (अन्नपते) औषधि अन्नों के पालन करनेहारे यजमान वा पुरोहित ! आप (नः) हमारे लिये (अनमीवस्य) रोगों के नाश से सुख को बढ़ाने (शुष्मिण:) बहुबलकारी (अन्नस्य) अन्न को (प्रप्रदेहि) अतिप्रकर्ष  के साथ दीजिये और इस अन्न के (दातारम्) देने हारे को (तारिष:)तृप्त कर तथा (नः) हमारे (द्विपदे) दो पग वाले मनुष्यादि तथा (चतुष्पदे) चार पगवाले गौ आदि पशुओं के लिये (उर्जम्) पराक्रम को (धेहि) धारण कर |

शंका : इस  मंत्र में केवल दो पैर और चार पैर वाले प्राणियों का ही विषय क्यों है ?

समाधान : इस मंत्र में मनुष्यों को इस संसार में कैसे-कैसे वर्त्तना इस विषय को कहा गया है | आइये महर्षि दयानन्द के वेद भाष्य से इसका भावार्थ लेते हैं –

भावार्थः – मनुष्यों को चाहिये कि सदैव बलकारी आरोग्य अन्न आप सेवें और दूसरों को देवें | मनुष्य तथा पशुओं के सुख और बल बढ़ावें | जिससे ईश्वर की सृष्टिक्रमानुकूल आचरण से सब के सुखों की सदा उन्नति होवे |

इस मंत्र में दो पैरों से मनुष्य जाती (humans) और चार पैरों से पशु जाती (animal kingdom) का तात्पर्य है | महर्षि दयानन्द ने गृहस्थों की हिंसा-दोष की निवृत्ति के लिये, गृहस्थों को प्रतिदिन पाँच महायज्ञों का विधान किया है | महर्षि मनु ने मनु स्मृति के ३/६८-७१ में चूल्हा, चक्की, झाड़ू, ओखली और जलकलश – ये पाँच गृहस्थों की हिंसा के मूल बतायें हैं |

महर्षि दयानन्द ने बलिवैश्वदेव यज्ञ में नित्य होम के बाद मनु स्मृति के ३/६२ को समझाते हुए कुत्तों, पतितों, चांडालों, कुष्टी आदि रोगियों, काक आदि पक्षियों और चींटी आदि कृमियों के लिये छः भाग अलग-अलग बाँट के दे देना और उनकी प्रसन्नता सदा करना बताया है |

चूँकि गृहस्थ मनुष्यों का कर्त्तव्य अन्य आश्रमों के साथ समस्त प्राणी मात्र की उन्नति कराना है; इसीलिए चार पैरों से पशु जाती का ग्रहण करना ही उचित है |

शंका : प्राणियों में तो वृक्ष भी आते हैं | उनका वर्णन इसमें क्यों नहीं है ?

समाधान : वृक्षों को नित्य होम द्वारा जल, वायु आदि की शुद्धि करते हुए दिया जाता है | नित्य होम समस्त प्राणियों के लिये उत्तम हैं जो उनको आरोग्य, बल, बुद्धि आदि प्राप्त कराते हैं |

—– पंडित प्रशांत शर्मा

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: